डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज:
GCP: डेटा प्रोसेसिंग के लिए Dataflow का उपयोग करें। डेटा को BigQuery में स्टोर करें।
AWS: प्रोसेस्ड डेटा को S3 में बैकअप करें। Lambda का उपयोग करके डेटा ट्रांसफर और ट्रांसफॉर्मेशन को ऑटोमेट करें।
मशीन लर्निंग मॉडल ट्रेनिंग और डिप्लॉयमेंट:
Azure: Azure Machine Learning का उपयोग करके मॉडल को ट्रेन और डिप्लॉय करें।
AWS: SageMaker का उपयोग करके मॉडल को प्रोडक्शन में तैनात करें और स्केल करें।
कंटेनराइजेशन और डिप्लॉयमेंट:
Docker: एप्लिकेशन और मशीन लर्निंग मॉडल को कंटेनर में पैक करें।
Azure AKS या AWS EKS: कंटेनराइज्ड एप्लिकेशन को Kubernetes क्लस्टर में डिप्लॉय करें।
संपूर्ण आर्किटेक्चर:
डेटा प्रोसेसिंग: GCP पर Dataflow का उपयोग करके डेटा प्रोसेस करें और BigQuery में स्टोर करें।
डेटा बैकअप: AWS S3 में डेटा का बैकअप लें और Lambda के साथ डेटा ट्रांसफर को ऑटोमेट करें।
मॉडल ट्रेनिंग: Azure ML पर मॉडल को ट्रेन करें और डिप्लॉय करें।
मॉडल डिप्लॉयमेंट: AWS SageMaker पर मॉडल को डिप्लॉय करें और स्केल करें।
कंटेनर मैनेजमेंट: Docker का उपयोग करके एप्लिकेशन को कंटेनराइज करें और Azure AKS या AWS EKS पर डिप्लॉय करें।
मशीन लर्निंग मॉडल ट्रेनिंग और डिप्लॉयमेंट
प्रोसेस:
मॉडल ट्रेनिंग:
Azure: आप Azure Machine Learning का उपयोग करके मशीन लर्निंग मॉडल को ट्रेन कर सकते हैं। यह डेटा को प्रोसेस करने और मॉडल को तैयार करने में मदद करता है।
मॉडल डिप्लॉयमेंट:
AWS: SageMaker का उपयोग करके आप प्रशिक्षित मॉडल को डिप्लॉय कर सकते हैं और इसे प्रोडक्शन में उपयोग कर सकते हैं।
कंटेनराइजेशन और डिप्लॉयमेंट
प्रोसेस:
कंटेनराइजेशन:
Docker: आपके एप्लिकेशन और मॉडल को एक कंटेनर में पैक करता है ताकि इसे कहीं भी डिप्लॉय किया जा सके।
कंटेनर डिप्लॉयमेंट:
Azure AKS या AWS EKS: Kubernetes क्लस्टर पर कंटेनर को डिप्लॉय और स्केल करता है।
कंटेनर और वर्चुअल मशीन (VM) में फर्क
वर्चुअल मशीन (VM):
VM पूरी तरह से एक ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) की नकल करती है और इसके ऊपर एप्लिकेशन चलाती है। इसके लिए आपको एक पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम और उसके साथ जुड़े रिसोर्सेज की जरूरत होती है।
उदाहरण: यदि आपके पास एक Windows VM है, तो उसमें Windows OS, और उस OS पर चलने वाले एप्लिकेशन होंगे। यह अधिक संसाधन लेता है और काफी भारी होता है।
कंटेनर:
कंटेनर केवल एप्लिकेशन और उसकी निर्भरताओं को संलग्न करता है, और यह ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ साझा करता है। यह हल्का और तेजी से लोड होने वाला होता है।
उदाहरण: यदि आपके पास एक Docker कंटेनर है, तो उसमें केवल एप्लिकेशन और उस एप्लिकेशन के लिए आवश्यक लाइब्रेरी और सेटिंग्स होंगी। यह बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के चलता है और तेजी से लोड होता है।
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